
झारखंड सरकार की मंईयां योजना को वित्तीय सुधारों से मिली मजबूती: कर्ज लेने की जरूरत नहीं
झारखंड सरकार की मंईयां योजना को जारी रखने के लिए राज्य सरकार के पास अब संसाधनों की कोई कमी नहीं है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य ने पिछले कुछ वर्षों में कर्ज नहीं लिया और बजट में सरप्लस (अधिकता) रही है। इसके साथ ही, राज्य सरकार कर्ज लेकर “रेवड़ी बांटने” जैसे आरोपों से भी बची रही है। इस वित्तीय स्थिति में कर्ज लेने की कोई आवश्यकता नहीं है, और यह तय होता दिख रहा है कि मंईयां योजना को कर्ज के बिना भी जारी रखा जा सकता है।
वित्तीय सुधारों का असर
झारखंड की सरकार ने पिछले चार-पाँच वर्षों में वित्तीय सुधारों की एक श्रृंखला को लागू किया। शुरुआत में राज्य ने महंगे ब्याज दरों पर कर्ज लेने पर रोक लगाई और बाद में ओपन मार्केट से कम ब्याज दरों पर राशि जुटाकर पहले से लिए गए कर्ज को चुकाया। इन सुधारों का सकारात्मक असर देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप राज्य का बजट लगातार सरप्लस रहा है। पिछले तीन वर्षों से झारखंड का बजट हर साल सरप्लस (अधिक) रहा है, और इस वित्तीय स्थिति का लाभ राज्य सरकार को मंईयां योजना जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम को जारी रखने में मिल रहा है।
मंईयां योजना का भविष्य
मंईयां योजना को चालू रखने के लिए पहले अनुमान था कि राज्य सरकार को लगभग 10,000 करोड़ रुपये की राशि का प्रबंध करना पड़ेगा, लेकिन अब सरकार के पास पहले से बची हुई राशि है, जो इस योजना के संचालन के लिए पर्याप्त है। राज्य सरकार पिछले तीन वर्षों में 15,000 करोड़ रुपये के करीब कर्ज भी चुका चुकी है, और यह वित्तीय सफलता राज्य सरकार को मंईयां योजना को निर्बाध रूप से जारी रखने में मदद करेगी।
मंईयां सम्मान योजना की प्रमुख बातें
- योजना का उद्देश्य: मंईयां सम्मान योजना के तहत राज्य सरकार हर महीने 1000 रुपये की राशि देती थी, जिसे अब बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया गया है।
- हेमंत सरकार का योगदान: इस योजना को बढ़ाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की जनता को राहत दी है, और इस फैसले का फायदा विधानसभा चुनाव में भी हेमंत सरकार को मिला।
- भाजपा का वादा: वहीं, भाजपा ने भी आगामी चुनावों में गोगो दीदी योजना के तहत राशि देने का वादा किया था, लेकिन मंईयां योजना के तहत सरकार पहले ही अपनी जिम्मेदारी निभा रही है।
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